
गरबा और डांडिया स्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए कालिका टीम मुस्तैद
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स्रोत: मूल रिपोर्ट, रूपनगढ़ न्यूज़ · प्रकाशक: Adi Parashakti Infotech Private Limited
नई दिल्ली/रूपनगढ़। जीवन बीमा ख़रीदने वालों के लिए पिछले एक साल का सबसे बड़ा बदलाव कर से जुड़ा है। वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार 22 सितंबर 2025 से सभी व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर जीएसटी की दर अठारह प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दी गई है। यह छूट टर्म प्लान, यूनिट लिंक्ड योजनाओं, एंडोमेंट, संपूर्ण जीवन और मनी-बैक पॉलिसियों पर लागू है।
इसका सीधा असर यह है कि जो टर्म प्लान पहले प्रीमियम पर अठारह प्रतिशत अतिरिक्त कर के साथ आता था, अब उतने ही कवर के लिए सस्ता पड़ता है। बारह हज़ार रुपये सालाना प्रीमियम वाली पॉलिसी पर पहले करीब 2,160 रुपये जीएसटी जुड़ता था, जो अब शून्य है।
यहाँ अपवाद भी साफ़ समझ लें। समूह जीवन बीमा और समूह क्रेडिट लाइफ़ पॉलिसियों पर अठारह प्रतिशत जीएसटी अब भी लागू है। कर्ज़ के साथ मिलने वाला समूह क्रेडिट लाइफ़ कवर इसी श्रेणी में आता है।
टर्म इंश्योरेंस क्या है और क्या नहीं है
टर्म इंश्योरेंस शुद्ध सुरक्षा है। इसमें एक तय अवधि के लिए कवर मिलता है और अवधि के भीतर बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर नॉमिनी को बीमा राशि मिलती है। अवधि पूरी होने पर कुछ वापस नहीं मिलता, और यही इसकी ख़ूबी है, क्योंकि इसी वजह से इसका प्रीमियम बहुत कम होता है।
यह निवेश नहीं है और इसे निवेश की तरह नहीं आँकना चाहिए। जो पॉलिसियाँ बीमा और निवेश दोनों का वादा करती हैं, उनमें आम तौर पर कवर कम और लागत ऊँची होती है। सुरक्षा और निवेश को अलग रखना लगभग हमेशा सस्ता और पारदर्शी पड़ता है।
कितने का कवर लेना चाहिए
आम व्यावहारिक नियम यह है कि कवर सालाना आय का दस से पंद्रह गुना हो। लेकिन आँकड़ा इतना सरल नहीं है। बेहतर तरीका यह है कि तीन चीज़ें जोड़ें।
पहला, आपके सभी कर्ज़, ख़ासकर होम लोन का बचा हुआ मूलधन। दूसरा, बच्चों की पढ़ाई और शादी जैसे बड़े भविष्य के ख़र्च का अनुमान। तीसरा, परिवार के मासिक ख़र्च का वह हिस्सा जो आपकी आय से चलता है, कम से कम दस से पंद्रह वर्षों के लिए।
इस जोड़ में से अपनी मौजूदा बचत और निवेश घटा दें। बाक़ी जो बचता है, वही ज़रूरी कवर है। तीस लाख रुपये के होम लोन और दो बच्चों वाले परिवार के लिए यह आँकड़ा अक्सर एक करोड़ रुपये के आसपास या उससे ऊपर बैठता है, जबकि बहुत लोग पच्चीस-पचास लाख का कवर लेकर निश्चिंत हो जाते हैं।
अच्छी बात यह है कि टर्म प्लान में कवर बढ़ाने की लागत अनुपात में कम होती है। कम उम्र में ली गई पॉलिसी का प्रीमियम पूरी अवधि तक वही रहता है, इसलिए जल्दी लेना सस्ता पड़ता है।
अवधि कितनी रखें
कवर उस उम्र तक चलना चाहिए जब तक आप पर किसी की आर्थिक निर्भरता है। आम तौर पर यह सेवानिवृत्ति की उम्र या सबसे छोटे बच्चे के आत्मनिर्भर होने तक होती है, जो भी बाद में आए।
बहुत लंबी अवधि, जैसे निन्यानबे वर्ष तक का कवर, प्रीमियम बढ़ा देता है जबकि उस उम्र में आम तौर पर कोई आर्थिक रूप से निर्भर नहीं रहता। दूसरी ओर बहुत छोटी अवधि लेने पर जोखिम है कि अवधि पूरी होने के बाद नई पॉलिसी उम्र और सेहत के कारण महंगी या अनुपलब्ध हो जाए।
वह गलती जो पूरा दावा डुबो देती है
टर्म इंश्योरेंस में दावा ख़ारिज होने की सबसे बड़ी वजह ग़लत या अधूरी जानकारी देना है, और इसका असर स्वास्थ्य बीमा से भी गंभीर होता है, क्योंकि यहाँ दावा तब आता है जब बीमित व्यक्ति मौजूद नहीं होता और सफ़ाई देने वाला कोई नहीं होता।
प्रस्ताव फ़ॉर्म में ये सब सही-सही बताना ज़रूरी है। तंबाकू या धूम्रपान की आदत, शराब का सेवन, मौजूदा बीमारियाँ, पिछली सर्जरी, परिवार में आनुवंशिक बीमारियों का इतिहास, आपका वास्तविक पेशा, और आपकी घोषित आय।
धूम्रपान छिपाना सबसे आम गलती है। धूम्रपान करने वाले का प्रीमियम अधिक होता है, और इसीलिए लोग इसे छिपाते हैं। मृत्यु के बाद चिकित्सा रिकॉर्ड या पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह सामने आ सकता है, और तब कंपनी को दावा अस्वीकार करने का वैध आधार मिल जाता है। सच बताने पर प्रीमियम कुछ हज़ार रुपये बढ़ता है, छिपाने पर परिवार को करोड़ों का नुक़सान हो सकता है।
एक क़ानूनी नुक़्ता जानना ज़रूरी है। बीमा कानून के प्रावधानों के अनुसार पॉलिसी जारी होने के तीन वर्ष बाद कंपनी किसी दावे को केवल ग़लत जानकारी के आधार पर सामान्यतः चुनौती नहीं दे सकती। यह प्रावधान पॉलिसीधारक के पक्ष में है, पर यह छिपाने का लाइसेंस नहीं है, क्योंकि शुरुआती वर्षों में दावा आने पर पूरी जाँच होती है।
नॉमिनी और दस्तावेज़: जिसे सब भूल जाते हैं
पॉलिसी लेकर रख देना आधा काम है। परिवार को यह पता होना चाहिए कि पॉलिसी है, किस कंपनी की है, और कागज़ या ईमेल कहाँ हैं। ऐसे बहुत मामले होते हैं जहाँ दावा कभी नहीं किया जाता क्योंकि परिवार को पॉलिसी का पता ही नहीं था।
नॉमिनी का नाम, जन्मतिथि और रिश्ता सही दर्ज कराएँ, और शादी या किसी बड़े पारिवारिक बदलाव के बाद उसे अद्यतन करें। नॉमिनी के बैंक खाते का विवरण भी सही रखें। पता या मोबाइल नंबर बदलने पर कंपनी को सूचित करें, वरना नवीकरण की सूचना नहीं पहुँचती और पॉलिसी चूक सकती है।
प्रीमियम भुगतान के लिए स्वतः डेबिट लगाना सबसे सुरक्षित तरीका है। टर्म पॉलिसी में एक चूकी हुई किस्त कवर रोक सकती है, और पुनर्जीवित कराने में समय और औपचारिकता लगती है।
प्रीमियम किन बातों पर तय होता है
टर्म प्लान का प्रीमियम मुख्य रूप से पाँच चीज़ों पर तय होता है, और इन्हें समझने से यह साफ़ हो जाता है कि देरी क्यों महंगी पड़ती है।
पहला और सबसे बड़ा कारक उम्र है। टर्म प्लान में प्रीमियम प्रवेश की उम्र पर तय होकर पूरी अवधि तक वही रहता है। तीस की उम्र में ली गई पॉलिसी का प्रीमियम चालीस की उम्र में ली गई उसी पॉलिसी से काफ़ी कम बैठता है, और यह अंतर पूरी अवधि तक हर साल चलता है।
दूसरा कारक तंबाकू का सेवन है। धूम्रपान या तंबाकू का उपयोग करने वालों का प्रीमियम स्पष्ट रूप से ऊँचा होता है।
तीसरा कारक कवर की राशि और अवधि है। चौथा कारक स्वास्थ्य की स्थिति और चिकित्सा इतिहास है। पाँचवाँ कारक पेशा है, क्योंकि कुछ जोखिम भरे कामों में प्रीमियम अधिक होता है या कुछ शर्तें जुड़ती हैं।
एक व्यावहारिक नतीजा यह निकलता है कि टर्म प्लान टालने की चीज़ नहीं है। जितनी देर होगी, उतना ही महंगा पड़ेगा, और बीच में कोई बीमारी पकड़ में आ जाए तो प्रीमियम और बढ़ जाता है या कवर मिलना मुश्किल हो जाता है।
भुगतान के विकल्प और उनका असर
टर्म प्लान में मृत्यु लाभ के भुगतान के आम तौर पर तीन विकल्प मिलते हैं, और यह चुनाव परिवार की स्थिति देखकर करना चाहिए।
पहला, एकमुश्त भुगतान, जिसमें पूरी राशि एक साथ मिलती है। यह तब उपयुक्त है जब परिवार को कोई बड़ा कर्ज़ चुकाना है या नॉमिनी पैसे का प्रबंध कर सकता है।
दूसरा, मासिक आय के रूप में भुगतान, जिसमें राशि किश्तों में मिलती है। यह तब बेहतर है जब परिवार में कोई ऐसा व्यक्ति न हो जो एक बड़ी राशि का प्रबंध कर सके, क्योंकि इससे नियमित आय बनी रहती है।
तीसरा, दोनों का मिश्रण, जिसमें एक हिस्सा एकमुश्त और बाक़ी मासिक आय के रूप में मिलता है। कर्ज़ चुकाने और घर चलाने, दोनों ज़रूरतों वाले परिवार के लिए यह संतुलित विकल्प होता है।
यह चुनाव पॉलिसी लेते समय दर्ज होता है, इसलिए सोच-समझकर करें और परिवार को बता दें।
कर्ज़ के साथ मिलने वाला कवर पर्याप्त नहीं होता
होम लोन लेते समय बैंक अक्सर समूह क्रेडिट लाइफ़ कवर देते हैं, जिसमें कर्ज़दार की मृत्यु पर बचा हुआ कर्ज़ चुक जाता है। यह उपयोगी है, पर इसे अपना टर्म प्लान मान लेना गलती है।
इसकी दो सीमाएँ हैं। पहली, यह कवर आम तौर पर घटता जाता है, क्योंकि यह बचे हुए कर्ज़ के साथ जुड़ा होता है, और कर्ज़ चुकने पर शून्य हो जाता है। दूसरी, इसका लाभ मुख्य रूप से कर्ज़ चुकाने में जाता है, परिवार के रोज़मर्रा के ख़र्च के लिए कुछ नहीं बचता। इसके अलावा समूह पॉलिसी होने के कारण इस पर अठारह प्रतिशत जीएसटी भी लागू रहता है।
इसलिए कर्ज़ के साथ मिले कवर को अतिरिक्त सुरक्षा मानें, और अपना स्वतंत्र टर्म प्लान अलग से रखें, जिसकी राशि पूरी अवधि तक स्थिर रहती है।
सामान्य सवाल
सवाल: क्या अब टर्म प्लान पर जीएसटी नहीं लगता?
जवाब: व्यक्तिगत जीवन बीमा पॉलिसियों पर 22 सितंबर 2025 से जीएसटी शून्य है। समूह पॉलिसियों पर अठारह प्रतिशत जारी है।
सवाल: प्रीमियम पर आयकर छूट मिलती है?
जवाब: पुरानी कर व्यवस्था में जीवन बीमा प्रीमियम पर धारा 80C के तहत कटौती उपलब्ध रही है। नई कर व्यवस्था में यह कटौती उपलब्ध नहीं होती। मृत्यु दावे की राशि की कर स्थिति के लिए मौजूदा प्रावधान कर सलाहकार से पुष्टि करें।
सवाल: ऑनलाइन टर्म प्लान भरोसेमंद है?
जवाब: हाँ, बशर्ते आप बीमा नियामक के पास पंजीकृत कंपनी से सीधे ख़रीदें। ऑनलाइन प्लान आम तौर पर सस्ते होते हैं क्योंकि उसमें मध्यस्थ का कमीशन नहीं होता। भुगतान हमेशा कंपनी के आधिकारिक माध्यम से करें, किसी एजेंट के निजी खाते में नहीं।
सवाल: क्या एक से अधिक टर्म पॉलिसी ली जा सकती है?
जवाब: हाँ। लेकिन हर नए प्रस्ताव में पहले से चल रही पॉलिसियों की जानकारी देना ज़रूरी होता है। यह छिपाना भी ग़लत जानकारी माना जाता है।
सवाल: राइडर लेना चाहिए या नहीं?
जवाब: गंभीर बीमारी और दुर्घटना से विकलांगता जैसे राइडर उपयोगी हो सकते हैं, पर हर राइडर की अलग शर्तें और बहिष्करण होते हैं। पहले आधार कवर पर्याप्त रखें, फिर राइडर पर विचार करें।
स्रोत और ज़रूरी सूचना
जीएसटी छूट से जुड़ी जानकारी वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट financialservices.gov.in पर उपलब्ध सूचना पर आधारित है, जिसके अनुसार यह छूट 22 सितंबर 2025 से प्रभावी है। लेख में दिया गया जीएसटी का उदाहरण केवल गणना दर्शाने के लिए है।
पॉलिसी की शर्तें, बहिष्करण और दावा प्रक्रिया हर कंपनी और उत्पाद में भिन्न होती है। इस लेख में किसी बीमा कंपनी या पॉलिसी की सिफ़ारिश नहीं की गई है और यह बीमा या वित्तीय सलाह नहीं है। कवर की राशि और अवधि का निर्णय आपकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है।
ख़रीदने से पहले पॉलिसी का विवरण दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें, प्रस्ताव फ़ॉर्म में हर जानकारी सही भरें, और ज़रूरत हो तो बीमा नियामक के पास पंजीकृत सलाहकार से परामर्श करें।
यह लेख रूपनगढ़ न्यूज़ डेस्क द्वारा पाठकों की व्यावहारिक जानकारी के लिए तैयार किया गया है। इसमें किसी बीमा कंपनी या मध्यस्थ से कोई प्रायोजन या भुगतान शामिल नहीं है।
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