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स्रोत: मूल रिपोर्ट, रूपनगढ़ न्यूज़ · प्रकाशक: Adi Parashakti Infotech Private Limited
नई दिल्ली/रूपनगढ़। भारत में कार चलाने के लिए कम से कम थर्ड पार्टी बीमा रखना क़ानूनी रूप से अनिवार्य है। बिना बीमा गाड़ी चलाना मोटर वाहन क़ानून के तहत दंडनीय है। इसी थर्ड पार्टी कवर का प्रीमियम बीमा नियामक यानी IRDAI तय करता है, और यह देश की सभी सामान्य बीमा कंपनियों पर एक समान लागू होता है। यानी इस हिस्से में कोई कंपनी सस्ती या महंगी नहीं होती।
निजी कारों के लिए इंजन क्षमता के आधार पर तय थर्ड पार्टी प्रीमियम इस प्रकार है। एक हज़ार सीसी तक की कार के लिए 2,094 रुपये। एक हज़ार एक सीसी से पंद्रह सौ सीसी तक की कार के लिए 3,416 रुपये। पंद्रह सौ सीसी से ऊपर की कार के लिए 7,897 रुपये।
ये दरें अठारह प्रतिशत जीएसटी को छोड़कर हैं। मोटर बीमा जीएसटी छूट के दायरे में नहीं आता, इसलिए इस पर अठारह प्रतिशत कर लागू रहता है। जीएसटी जोड़कर देखें तो एक हज़ार सीसी तक की कार पर यह राशि करीब 2,471 रुपये, पंद्रह सौ सीसी तक पर करीब 4,031 रुपये और उससे ऊपर पर करीब 9,318 रुपये बैठती है। यही दरें नई और नवीकरण दोनों पॉलिसियों पर समान रूप से लागू होती हैं।
बिजली और हाइब्रिड वाहनों पर छूट
निजी इलेक्ट्रिक वाहनों के थर्ड पार्टी प्रीमियम पर पंद्रह प्रतिशत की छूट दी जाती है, और हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों पर साढ़े सात प्रतिशत की छूट लागू होती है। यह छूट सीधे थर्ड पार्टी प्रीमियम पर मिलती है, इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन रखने वालों को नवीकरण के समय इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए कि छूट लगी है या नहीं।
एक अहम सूचना यह भी है कि थर्ड पार्टी दरें लगभग छह वर्षों से अपरिवर्तित रही हैं, और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा बीमा नियामक के बीच इन दरों में दस से पच्चीस प्रतिशत तक वृद्धि के प्रस्ताव पर विचार चल रहा है। उद्योग के कुछ अनुमानों में कुछ श्रेणियों के लिए यह वृद्धि अठारह से पच्चीस प्रतिशत तक आँकी गई है। यह प्रस्ताव है, अधिसूचित बदलाव नहीं, इसलिए नवीकरण के समय मौजूदा अधिसूचित दर ही देखें।
थर्ड पार्टी और कॉम्प्रिहेंसिव में फ़र्क़
थर्ड पार्टी कवर में केवल दूसरे व्यक्ति को हुआ नुक़सान कवर होता है, चाहे वह शारीरिक चोट हो या उसकी संपत्ति का नुक़सान। आपकी अपनी गाड़ी को हुआ नुक़सान इसमें कवर नहीं होता।
कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में थर्ड पार्टी कवर के साथ आपकी गाड़ी को हुआ नुक़सान भी शामिल होता है, जिसमें दुर्घटना, आग, चोरी और प्राकृतिक आपदा शामिल हैं। इस हिस्से का प्रीमियम कंपनियाँ ख़ुद तय करती हैं, इसलिए यहाँ तुलना करने पर बचत होती है।
अगर गाड़ी नई है, कर्ज़ पर ली गई है, या शहर में रोज़ चलती है तो कॉम्प्रिहेंसिव लेना व्यावहारिक होता है। बहुत पुरानी और कम कीमत वाली गाड़ी के मामले में केवल थर्ड पार्टी लेना भी समझदारी हो सकती है, क्योंकि तब गाड़ी का बीमित मूल्य ही कम बचता है।
IDV वह आँकड़ा है जो क्लेम की सीमा तय करता है
बीमित घोषित मूल्य यानी IDV आपकी गाड़ी का वह मूल्य है जिस पर बीमा कंपनी कुल हानि या चोरी की स्थिति में भुगतान करती है। यह गाड़ी के निर्माता की सूचीबद्ध कीमत में उम्र के अनुसार मूल्यह्रास घटाकर निकाला जाता है।
यहाँ कई लोग महंगी गलती करते हैं। प्रीमियम कम करने के लिए IDV जान-बूझकर कम करा लेते हैं। प्रीमियम तो कुछ सौ रुपये कम हो जाता है, लेकिन गाड़ी चोरी होने या पूरी तरह नष्ट होने पर भुगतान उसी कम IDV के हिसाब से मिलता है। नुक़सान हज़ारों में नहीं, लाखों में होता है।
इसका उलटा भी सही नहीं है। ज़रूरत से बहुत ज़्यादा IDV रखने पर प्रीमियम बढ़ता है और दावे के समय कंपनी वास्तविक बाज़ार मूल्य से ही आँकलन करती है। सही तरीका यह है कि IDV गाड़ी के वास्तविक बाज़ार मूल्य के आसपास रखें।
क्लेम में कटौती क्यों होती है और कैसे बचें
दावा मंज़ूर होने के बाद भी पूरी राशि न मिलने की कुछ तय वजहें हैं।
पहली है मूल्यह्रास। प्लास्टिक, रबर और फ़ाइबर के पुर्ज़ों पर मूल्यह्रास की ऊँची दर लागू होती है, इसलिए बंपर जैसे हिस्सों पर बड़ी कटौती होती है। इससे बचने के लिए शून्य मूल्यह्रास यानी ज़ीरो डेप्रिसिएशन राइडर लिया जाता है, जो नई और तीन-चार साल तक की गाड़ियों के लिए आम तौर पर फ़ायदेमंद पड़ता है।
दूसरी है अनिवार्य कटौती योग्य राशि, जो हर दावे में आपके हिस्से की तय रकम होती है।
तीसरी है उपभोग्य सामग्री, जैसे इंजन ऑयल और नट-बोल्ट, जो सामान्य पॉलिसी में कवर नहीं होती। इसके लिए अलग राइडर मिलता है।
चौथी और सबसे गंभीर वजह है पॉलिसी की शर्त का उल्लंघन। बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस गाड़ी चलाना, नशे की हालत में गाड़ी चलाना, निजी गाड़ी का व्यावसायिक उपयोग करना, या इंजन में पानी भर जाने के बाद गाड़ी स्टार्ट करने की कोशिश करना, इन स्थितियों में दावा अस्वीकार हो सकता है।
बाढ़ या जलभराव के बाद एक नियम याद रखें। पानी में डूबी गाड़ी को स्टार्ट करने की कोशिश न करें। इससे इंजन को होने वाला नुक़सान अक्सर सामान्य पॉलिसी के दायरे से बाहर माना जाता है। पहले बीमा कंपनी को सूचित करें और गाड़ी को टो कराकर अधिकृत सेवा केंद्र ले जाएँ।
नो-क्लेम बोनस: छोटे दावे से होने वाला नुक़सान
बिना दावा किए हर साल नवीकरण पर नो-क्लेम बोनस मिलता है, जो अपनी गाड़ी के नुक़सान वाले हिस्से के प्रीमियम पर छूट देता है और लगातार दावा-मुक्त वर्षों के साथ बढ़ता जाता है।
व्यावहारिक सलाह यह है कि बहुत छोटी खरोंच या मामूली नुक़सान के लिए दावा न करें। एक छोटा दावा जमा किया हुआ बोनस शून्य कर देता है, और अगले वर्षों में बढ़ा हुआ प्रीमियम उस छोटे दावे से मिली राशि से ज़्यादा पड़ सकता है। दावा करने से पहले मरम्मत की अनुमानित लागत और बोनस के नुक़सान की तुलना कर लें।
गाड़ी बेचते समय नो-क्लेम बोनस आपके नाम रहता है और नई गाड़ी की पॉलिसी में स्थानांतरित कराया जा सकता है। इसके लिए पुरानी कंपनी से प्रमाणपत्र लेना होता है।
कौन से राइडर असल में काम के हैं
कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी के साथ मिलने वाले हर राइडर की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कुछ की उपयोगिता आँकड़ों में साफ़ दिखती है।
शून्य मूल्यह्रास राइडर नई गाड़ियों के लिए सबसे उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इसके बिना प्लास्टिक और फ़ाइबर के पुर्ज़ों पर बड़ी कटौती लगती है। आम तौर पर यह पाँच साल तक की गाड़ी पर उपलब्ध होता है।
इंजन सुरक्षा राइडर उन इलाक़ों में मायने रखता है जहाँ जलभराव होता है, क्योंकि पानी से इंजन को होने वाला नुक़सान सामान्य पॉलिसी में अक्सर कवर नहीं होता।
चालक-रहित खर्च या सड़क किनारे सहायता राइडर लंबी यात्रा करने वालों के लिए उपयोगी है, क्योंकि गाड़ी बीच रास्ते ख़राब होने पर टोइंग और मौक़े पर मरम्मत की सुविधा मिलती है।
उपभोग्य सामग्री राइडर इंजन ऑयल, कूलेंट और नट-बोल्ट जैसी चीज़ों को कवर करता है, जो दावे के बिल में छोटी लगती हैं पर बड़ी मरम्मत में हज़ारों में जुड़ जाती हैं।
चालक और सवारियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना कवर अलग मामला है। वाहन मालिक-चालक के लिए एक निर्धारित राशि का व्यक्तिगत दुर्घटना कवर अनिवार्य श्रेणी में आता है, और सवारियों के लिए अतिरिक्त कवर वैकल्पिक रूप से लिया जा सकता है। परिवार के साथ यात्रा करने वालों को यह देख लेना चाहिए।
प्रीमियम घटाने के वैध तरीके
पहला, ऐच्छिक कटौती योग्य राशि यानी वॉलंटरी डिडक्टिबल बढ़ाना। इसमें आप हर दावे में अपने हिस्से की राशि बढ़ाने पर सहमत होते हैं और बदले में प्रीमियम कम होता है। यह उन लोगों के लिए ठीक है जो छोटे दावे नहीं करते।
दूसरा, नो-क्लेम बोनस बचाकर रखना, जो सबसे बड़ी और मुफ़्त छूट है।
तीसरा, मान्यता प्राप्त चोरी-रोधी उपकरण लगवाना, जिस पर कुछ कंपनियाँ छूट देती हैं।
चौथा, अपनी गाड़ी के नुक़सान वाले हिस्से की दरों की तुलना करना, क्योंकि यही हिस्सा कंपनियों के बीच अलग होता है। थर्ड पार्टी हिस्से में तुलना का कोई अर्थ नहीं, वह सबके लिए एक है।
पाँचवाँ, पॉलिसी लैप्स न होने देना, क्योंकि निरंतरता टूटने पर बोनस चला जाता है और निरीक्षण की औपचारिकता बढ़ती है।
जो नहीं करना चाहिए वह यह है कि IDV घटाकर प्रीमियम कम कराया जाए। यह बचत दिखती है पर चोरी या कुल हानि की स्थिति में बहुत भारी पड़ती है।
रूपनगढ़ और आसपास के वाहन मालिकों के लिए
छोटे क़स्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में एक व्यावहारिक बात मायने रखती है। पॉलिसी लेने से पहले देख लें कि आपके क़स्बे या नज़दीकी ज़िला मुख्यालय में कंपनी का कोई अधिकृत नक़दी-रहित गैराज है या नहीं। बड़ी कंपनी का नाम होने भर से नक़दी-रहित मरम्मत नहीं मिलती, उसके लिए गैराज का नेटवर्क में होना ज़रूरी है। नेटवर्क में गैराज न होने पर पहले अपनी जेब से मरम्मत करानी पड़ती है और बाद में प्रतिपूर्ति का दावा करना होता है, जिसमें समय और दस्तावेज़ी काम बढ़ जाता है।
दूसरी बात, बीमा हमेशा कंपनी के आधिकारिक माध्यम से या मान्यता प्राप्त मध्यस्थ से ही ख़रीदें और भुगतान की रसीद लें। किसी व्यक्ति के निजी खाते में प्रीमियम भेजना जोखिम भरा है। पॉलिसी मिलने के बाद उसका नंबर और कंपनी का टोल-फ़्री नंबर गाड़ी में और फ़ोन में दर्ज रखें, क्योंकि दुर्घटना के समय यही सबसे पहले काम आता है।
सामान्य सवाल
सवाल: थर्ड पार्टी प्रीमियम हर कंपनी में एक जैसा क्यों है?
जवाब: क्योंकि यह दर बीमा नियामक तय करता है और सभी कंपनियों पर समान रूप से लागू होती है। कंपनियाँ केवल अपनी गाड़ी के नुक़सान वाले हिस्से और राइडर पर प्रतिस्पर्धा करती हैं।
सवाल: पॉलिसी लैप्स हो गई तो क्या करें?
जवाब: तुरंत नवीकरण कराएँ। बीच का समय बिना बीमा रहने पर आप क़ानूनी जोखिम में रहते हैं, और लंबे अंतराल के बाद कंपनी गाड़ी का भौतिक निरीक्षण माँग सकती है। नो-क्लेम बोनस भी निर्धारित अवधि के बाद समाप्त हो जाता है।
सवाल: क्या पॉलिसी दूसरी कंपनी में बदल सकते हैं?
जवाब: हाँ, नवीकरण के समय। नो-क्लेम बोनस भी साथ ले जाया जा सकता है। बदलने से पहले केवल प्रीमियम न देखें, कैशलेस गैराज नेटवर्क और दावा निपटान का रिकॉर्ड भी देखें।
सवाल: सीएनजी किट लगवाई है, बीमा में बताना ज़रूरी है?
जवाब: हाँ। बाद में लगवाई गई सीएनजी किट की जानकारी कंपनी को देकर पॉलिसी में दर्ज कराना ज़रूरी है, वरना उससे जुड़े नुक़सान पर दावा अस्वीकार हो सकता है।
सवाल: दुर्घटना के बाद सबसे पहले क्या करें?
जवाब: घायल व्यक्ति की मदद पहली प्राथमिकता है। इसके बाद बीमा कंपनी के टोल-फ़्री नंबर पर तुरंत सूचना दें, घटनास्थल की तस्वीरें लें, और गंभीर दुर्घटना या चोरी की स्थिति में पुलिस को सूचित करके रिपोर्ट दर्ज कराएँ। देर से सूचना देना दावे में अड़चन बनती है।
स्रोत और ज़रूरी सूचना
निजी कारों के थर्ड पार्टी प्रीमियम की दरें और इलेक्ट्रिक तथा हाइब्रिड वाहनों पर छूट बीमा नियामक द्वारा अधिसूचित दरों के आधार पर सितंबर 2026 तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी पर आधारित हैं। जीएसटी जोड़कर दी गई राशि अठारह प्रतिशत की दर से गणना की गई है और निकटतम रुपये तक पूर्णांकित है। दरों में वृद्धि का उल्लेख विचाराधीन प्रस्ताव के रूप में किया गया है, यह अधिसूचित परिवर्तन नहीं है।
पॉलिसी की शर्तें, बहिष्करण, राइडर और दावा प्रक्रिया हर कंपनी और उत्पाद में भिन्न होती है। यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, किसी बीमा कंपनी या उत्पाद की सिफ़ारिश नहीं, और बीमा सलाह नहीं है। नवीकरण से पहले अपनी पॉलिसी की मौजूदा दर, IDV और शर्तें कंपनी से पुष्टि करें और पॉलिसी दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें।
यह लेख रूपनगढ़ न्यूज़ डेस्क द्वारा पाठकों की व्यावहारिक जानकारी के लिए तैयार किया गया है। इसमें किसी बीमा कंपनी या मध्यस्थ से कोई प्रायोजन या भुगतान शामिल नहीं है।
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